
नाम की महिमा भाग -21
#नाम_की_महिमा प्रस्तुति #कौशल्य_फाउंडेशन_सोसाइटी
*****भाग- 21****
*********नाम की महिमा**********
दोहा तुम सर्वग्य कृपाल दयाला ,तुम सब जानऊ दीनदयाला|
जो तुम्हे भावे सो मोय दीजे,परि ज्ञान विवेक भगत नही छीजै||
सोई मति सोई गति ,सोई भगति तुम जानऊ भेद हमार |
रज चरना शरना लई,सो करो हमे भव पार||
चौपाई द्विचित्ता कबऊ नही उभरे ,जो होय ज्ञान वोहू सब बिसरे |
वोही चतुर वोही अति गुण बंता,नामही भजहिं कहहिं जाय संता||
नाम एक पावन भव तारन ,धरे रूप जग काज समारण|
नाम ही सब जग खेल रचायो,वीरता जीव जगत भरमायो ||
दोहा लम्पट विषयी जिव जग,अहमी क्रोधी क्रूर गंवार |
लाख चिताओं चेतौ नही ,वे खाय यमन की मार ||
चौपाई बिसाई जीव कबहूँ नही पावत ,मान ज्ञान निज हीय अति भावत |
जो खोजत पर दोष सदाहीं ,जिन तन बसहिं न नाम सदा ही ||
कपटी चुगल और परद्रोही ,प्रीत नाम संग कबहूँ न होही|
को जग नर तन अस जग माही ,ब्रह्म अनादी जपहिं नित नाही ||
नाम अनादी रहियो सब काला,नारद व्यास जपेहूँ तिहु काला|
नाम ही जपा मनु सतरूपा ,दर्शन दिए नाम धरि रूपा||
नाम ही सब जग ज्योति पसारा ,नरसी भगतऊनाम पुकारा|
नाम अखंड ज्योति उजियारा ,अष्टबक्र सुखदेव समारा||
******भरत सिंह (अध्यात्मिक विद)**********



