
नाम की महिमा भाग -20
#नाम_की_महिमा प्रस्तुति #कौशल्य_फाउंडेशन_सोसाइटी
*****भाग- 20****
*********नाम की महिमा**********
सोरठा बिनमऊ नाम महान ,अव्यक्त रूपं व्यापक सदा|
अनुभवगम्य अनंत ,जपहिं संत निसदिन सदा||
करहुं अनुग्रह तोय ,बसहूँ सदा ह्रदय मम|
बनहूँ पपीहा तोर,लोभ क्रोध व्यापहिं न मम||
है तू दीन कृपाल,चितानन्द चिनमय सदा|
हरहूँ मोह मम द्रोह,भजहु निरंतर तोय सदा ||
सुनहूँ कामना मोर ,सदा नाम बिसरहिं नही|
कृपा धाम सुख नाम,राग द्वेष व्यापहिं नही||
नामही एक सार ,और सार जग कुछ नही|
कहते संत पुकार ,बिना नाम जीव मुक्ति नहीं ||
दोहा चौदहूँ भुवन एक तू स्वामी दीन दयाल तू अन्तर्यामी |
घृणा दोष द्वदादि सब तू ही नसाबन हार||
मै लोभी क्रोधी लम्पट सदा ,तू भव बन्धि छुडवान हार |
सवैया नाम का ही तत्व सारा नाम गुण गाओ सदा|
नाम के ही संग से भव बन्धि छुट जाएगी||
जोगी जती तपी सती सब नाम की ही आस करे |
नाम कौ प्रभाव ऐसो बिगड़ जाय भक्ति तऊ,नर देह तऊ मिल जाएगी ||
दोहा बंदहूँ गुरु तुम लख मुखार बिंदा,नाम पुनीत परम धन सुख कंदा|
चौपाई बंदऊ गुरु पद रज अति पावन ,दम्भ कपट छल छिद्र नसावन|
बंदऊ गुरु तुम दीनदयाला,मोसेऊ अधम तुम कीन निहाला ||
बंदऊ बार बार पद रज कौ ,होय उजियार हरें सब तम कौ|
बंदन करूँ सौ वार गुंसाई,भव बिच पड़ा सब बन्धि छुड़ाई ||
दोहा बार बार वन्दन करूँ,करूँ मै सौ सौ वार |
इस मोह रूप संसार से तुम करते रहियो पार||
******भरत सिंह (अध्यात्मिक विद)**********



