
नाम की महिमा भाग -16
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*****भाग- 16****
*********नाम की महिमा**********
चौपाई संत सुखद हैं अति गम्भीरा,मिलतहिं हरहिं जीव केहिं पीर|
नर तन दुर्लभ है संसारा,भजियो नाम सब काज विसारा||
संत सत्य अति ह्रदय उदारा,जो जाय शरन करहिं भव पारा|
करिअऊ प्रीत संत संग जाई,वेड पुराण शास्त्र सब गई||
संतन नमन करेउ अवतारा,श्रुतिअउ ग्रन्थ सभी उच्चारा|
दोहा आठ,बारह,सोलह कला,ले प्रगटे अवतार|
पूरा आया संत जो,चौबीस कला करतार||
है पूरा करतार,नाम से जीव आत्मा जोड़ी |
भेद अभेद कछु नहीं जानो ,अंधा हो या कोढ़ी||
उस नाम रूपी करतार ने संसार में दो प्रकार की तेजस्वी शक्तियों को भेजा जिनको हम इस प्रकार भी कह सकते हैं कि शक्ति और ज्योति एक काल पावर एक दयाल पावर काल पावर में अवतार हैं और दयाल पावर में संत हैं
दोहा रामकृष्ण दुष्टा हने ,थी जो शक्ति प्रचंड |
नानक कबीरा जीव उभारन भये,थी जो ज्योति अखंड||
अवतार संत दोनों का ही रहा,है गुरु शबद धुनि नाम |
जपे उसे संता सदा ,वही संतन का गुरु नाम ||
जिनने पाया सत्य को ,उन्ही को कहे संत|
जो अपने को संता कहे ,उन्हें मिला नहीं भगवंत||
चौपाई करनी करहिं फल पाय मुनिंदा,बिन सतगुरु मिलहिं कटहिं नहिं फंदा|
वही अति गुनी वाही अति चातुर,नाम ही शब्द जपहिं निस बासर||
नाम ही अलख ज्योति का स्वामी,मिलहिं भेद जो लोलुप कामी|
मान बढ़प्पन जिन तनन विराजा,मलाहीं राम बिगर सब काजा||
मान गुमान कबहूँ नही कीजे,भ्रमवशबुद्धि निरंतर छीजे|
दोहा जाके मन मंदिर नहिं बसहिं, नाम रूप आधार |
नाम भेद जानत नहीं, बृथा करत तकरार||
क्योकि बार बार संत कहते चले आये हैं कि नाम के सुयास का बखान नही वह तो बखान से परे है|
**************भरत सिंह (अध्यात्मिक विद)*******************


