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नाम की महिमा भाग -02

*********हृदयोदगार*********

 

इस आधुनिक युग में मनुष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति करने के चक्कर में तमाम झंझावातों और आपाधापी में लगा हुआ है फिर भी इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर पाता है क्योंकि इच्छाएं तो इतनी प्रबल है कि कभी कम ही नहीं होती हैं।कई बार ऐसा भी देखा जाता है की पूर्ति करते करते मनुष्य कुमार्ग की तरफ बढ़ता चला जाता है भगवान ने जब जीवन दिया है तो पारिवारिक व सामाजिक दायित्वों का निर्वहन तो करना ही पड़ेगा किंतु हम उसमें लिपायमान हो जाए अथवा कुमार्ग की ओर अग्रसर हो जाएं यही भूल है ।

आज का युग अपनी संस्कृति सभ्यता अच्छे आचरण अध्यात्म ज्ञान को छोड़कर विभिन्न कुसंगतियों में फंसता जा रहा है और दिन प्रतिदिन अपने जीवन को खोता जा रहा है क्योंकि जितनी भी सांसारिक वस्तुएं हैं वह लाभकारी कम होती है और हानिकारक अधिक होती हैं जैसे मोबाइल टीवी इत्यादि।

आज के समय में अध्यात्म पर चिंतन एवं कर मनन करने की अत्यंत आवश्यकता है क्योंकि हम अध्यात्म से विमुख होते जा रहे हैं परंतु सत्य तो यह है कि अध्यात्म एक ऐसा विषय है जिससे आत्मानुभव आत्मिक शक्ति का बोध होता है सत्य पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा उत्पन्न होती है तथा मनुष्य धैर्यवान एवं निष्ठावान बनता है और अपने सत्य एवं कर्तव्य पथ पर निर्भीकता से आगे बढ़ता रहता है।

मनुष्य जो अपने वास्तविक पथ से भटक गया है वह चिंतन करें एवं सुमार्ग के पथ पर आवे और बड़ी ही सहजता से अपने परम लक्ष्य को प्राप्त कर सके यही मेरी जीवन का परम उद्देश्य है।।

 

*********भरत सिंह(अध्यात्मिक विद) *********

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