
बेवसाइट, मोबाइल और गजेट्स मासूमों को बना रहे अपराधी
अभी हाल में कानपुर में एक ऐसी घटना घटी थी जिससे सभी मां-बाप के कान खड़े हो गए। जिसमें एक चार साल की मासूम बच्ची के साथ दस वर्ष के आयु के चार बच्चों ने सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दे डला था। पुलिस की पूछताछ में बच्चों ने बताया था कि हमने घर पर रखे पिता के मोबाइल चुरा लाए, जिसमें पोर्न फिल्म अपलोड थी। इस फिल्म को देखकर उसकी नकल करते हुए हमने बच्ची के साथ रेप किया था। वहीं जब हमने लखनऊ जेल से आंकड़े जुटाए तो पता चला कि साल 2018 में अब तक 31 ऐसे बच्चे है जो जुर्म की दुनिया में कदम रख चुके है।
बाल मनोवैज्ञानिक नर्मता सिंह कहती हैं कि आधुनिकता के चकाचौंध में बचपन भटक रहा है। पिछले तीन-चार वर्षों से हम देख रहे हैं कि बच्चों में हिंसा काफी बढ़ी है। बच्चों को सीख टीवी व एंड्रायड मोबाइल से मिल रही है। बच्चे क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया जैसे सिरियल को देखते है अौर फिर वैसा ही करने की कोशिश करते है। समय रहते ऐसे बच्चों की गतिविधि पर ध्यान नहीं दी गई तो आने वाला समय भयावह होगा।
वे कहती हैं कि मोबाइल और इंटरनेट के जमाने ने भले ही हमें घर बैठे हर सुविधा उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहा है। बालपन में ही तैश में आकर अपनों का ही गला रेत रहा है। बच्चों में लगातार ऐसी प्रवृत्ति बढ़ रही है। इन दिनों समाज में सबसे बुरा असर इंटरनेट डाल रहा है। व्हाट्सएप के माध्यम से बचपन अश्लील वीडियो को डाउनलोड कर लोगों को परोसा जा रहा है। अच्छे काम करने की बजाय वह अपराध का रास्ता अख्तियार कर रहा है। छोटी उम्र में ही बच्चे मोबाइल के माध्यम से चोरी, लूट, मारपीट जैसे कई अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे अपराधों के चलते उन्हें कम उम्र में ही कोर्ट कचहरी के चक्कर काटना पड़ रहा है।



