
नाम की महिमा भाग – 24
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*****भाग- 24****
*********नाम की महिमा**********
दोहा- नाम ही जपे और सतगुरु सेवे ,बाकू काल कबहूँ नहीं छेड़े|
नाम ही एक सकल विख्याता,नाम ही उपल सब सृष्टि रचाता||
नाम के विषय में जो पुरुष पूर्णरूपेण या तो समझी ही नहीं या अहंकार बस मानने के लिए तैयार नहीं या ना से नाम की झलक मालूम पड़ती है वहां तक पहुंचे ही नहीं बड़े ही योग साधन अनेकों किए हो क्योंकि नाम का मामला बहुत पेचीदा है गहन से भी गहन है अगर वास्तविकता में सतगुरु से मुलाकात हो जाए तो वह हमें नाम की दात बख्श दे और हमारी मन बुद्धि में तथा अनुभव में बात एक मिल हो जाए तो हमें नाम की पराकाष्ठा का पूर्ण बोध होगा और इस प्रकार जो ज्ञान होगा वह अनुभव से सना हुआ पराविद्या का सार होगा यह ज्ञान उसी व्यक्ति को प्राप्त है जिसके ऊपर उस परमपिता की कृपा दया तथा दृष्टि निरंतर कार्यरत है ऐसे ही पुरुषों को महापुरुष समय का सतगुरु नाम तन अनेकों नामों से पुकारते हैं क्योंकि यह महापुरुष उस परमात्मा रूपी नाम में एकमिल होते हैं जिनको हम जीता जागता चलता फिरता खुदा भी कहते हैं ऐसे ही पुरुषों ने उस परमात्मा की अलौकिक क्रियाओं से अज्ञान रूपी संसार को अवगत कराया हुई हुई चेतना को जागृत किया और समाज में फैली हुई जो कुरीतियां थी उनका खंडन मंडन किया हालांकि उन्होंने किसी धर्म जाति प्रपंच की आलोचना नहीं की जो बात हकीकत थी उसी हकीकत में ही पेश किया जो सनातन से सनातन पुरातन पुरातन है उन्होंने कोई नई बात को अपनी तरफ से नहीं जोड़ा घटाया उन्होंने तो सभी शास्त्रों संतों का जो मुख्य सार था उसे ही नजर भर के आधार पर किस किया है शास्त्रों के आधार से बात स्पष्ट है कि धर्म के प्रवर्तक हूं उसी प्रकार उलझा दिया है कि बात स्पष्ट होते हुए भी बुनियादी की बन गई जो अच्छे-अच्छे ज्ञानियों की बुद्धि में भी एकमत होकर नहीं बैठती इसलिए तो नाना पंत में विवाद है जकड़ है यह जकड़ ही हमारे मोह अहम आशा इर्ष्या को समाप्त नहीं होने देती और हम को सही रास्ता नहीं मिलता लिहाजा सब कुछ करते हुए भी जो नाम है उस से तालमेल नहीं कर पाते जो जीवन मरण की बंदि को छुड़ाने वाला है यहां एक नाम ही है जो परमात्मा मैं लय करने का एकमात्र साधन है सो भी ब्रह्म से नीचे नाम झलक प्रतीत नहीं होता है जिसका ही बयान उन महापुरुषों ने किया चाय अष्टावक्र हुए चाय सुखदेव नानक कबीर रैदास बामदेव नामदेव वही बात मुझे दर्शन नहीं बताई नाम ही सभी तत्वों का सार है
******भरत सिंह (अध्यात्मिक विद)**********



