
#नाम_की_महिमा प्रस्तुति #कौशल्य_फाउंडेशन_सोसाइटी
*****भाग- 5****
*********भूमिका**********
मुझे अत्यंत प्रशन्नता एवं आनंद की अनुभूति हो रही है कि नाम कि “नाम की महिमा” जैसी महान पुस्तक की भूमिका लिखने का गौरव प्राप्त हुआ क्योकि आज के युग में विभिन्न मत मतान्तरों ने परमपिता परमेश्वर में जिज्ञासा रखने वाले जिज्ञासू मानवों को भ्रमित कर दिया है ,जिससे वह वास्तविक लक्ष्य से भटक जाते हैं और परमेश्वर प्राप्ति में अपना जीवन तो लगा देते हैं परन्तु परमपिता परमेश्वर (प्रकाश व ध्वनि)को प्राप्त नही कर पाते क्योकि आत्मा तो परमात्मा का स्वरूप है लेकिन हम उस स्वरूप को देख नही पाते हैं क्योकि इस नश्वर माया ने हमारी आत्मा पर जाल बिछा रखा है और हम सांसारिक रीति-रिवाजों क्रिया -कलापों में फंसे रहते हैं इसलिए हम उस परमसत्ता ,परमज्योति ,परमध्वनि को पहचान ही नही पाते हैं और हम धीरे -धीरे हम उस प्रकाश से दूर होते चले जाते हैं एवं जो हम देख रहे हैं उसे ही सत्य मानने लग जाते हैं लेकिन वास्तविकता तो यह है कि संसार को चलाने वाली शक्ति जो कण-कण में विधमान है जिसके बिना पत्ता नही हिल सकता जिसने चौरासी लाख योनियों की पूर्ण व्यवस्था की है एक मात्र वाही सत्य है बाकी सब निरर्थक है जिसके प्रमाण सभी ग्रन्थों में भी मिलते हैं गोस्वामी तुलसीदास ने भी राम चरित मानस में “ नाम” का जिक्र किया है “कलयुग केवल नाम अधारा,सुमीर-सुमीर नर उतरहिं पारा” और संतों ने भी राम-नाम चारों रूपों में प्रस्तुत किया है | एक राम दशरथ का बेटा,एक राम घट घट में बैठा,एक राम का सकल पसारा ,एक राम इन सब से न्यारा , जो राम इन सब से न्यारा है वही “नाम” है | वास्तव में नाम की महिमा अपरम्पार है जिसके घट में नाम जाग्रत हो जाता है उसके अंदर प्रेम की भावना उत्पन्न हो जाती है | अतः प्रस्तुत पुस्तक के प्रूफ का अध्ययन करते समय अनमोल उपादेय सामिग्री के बाहुल्य को देखकर अपार हर्ष हुआ क्योकि जीवन कला के क्षेत्र में परमार्थभिलाशियों को पग पग पर बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन बहुत गहरी सूझ-बुझ का परिचय तथा सही सुनिश्चित मार्गदर्शन इस पुस्तक में मिलता है जिसके प्रकाश से परमार्थ पथ का यात्री अपना रास्ता तलाश कर सकता है और बताया है कि संसार में रह्गकर अपने सभी दायित्वों पूर्ण निर्वहन करते हुए उस “नाम” से जुडो जो परम सत्य है मुझे पूरा विश्वास है कि कोई भी सच्चा प्रभु भक्त जो सत्य पथ पर उन्नति के लिए इस पुस्तक को पढ़ेगा उसे निराशा नही होगी और बहुत ही सहज तरीके से एक सच्चा इंसान बनकर अपने वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा ,और अनन्तः अनंत ज्योति में विलीन हो जाएगा |
**************बच्चू सिंह(पी०सी०एस०)*******************
पूर्व कुल सचिव गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी नॉएडा
निवर्तमान ए०डी०एम० प्रोटोकाल बनारस प्रसाशन



