
नाम_की_महिमा भाग-१
#कौशल्य_फाउंडेशन_सोसाइटी
करूं वंदना नाम रूप की,कुछ अंश तूने मम दिया दिखाय।
भाव और प्रेम बसा घट मम,हृदय में अपना नूर दिया दर्शाय।।
अंतर्ध्वनि सुनाकर नाम तूने,मन इंद्रिय को मोह लिया। ज्योति रूप दिखाकर नाम तूने बुद्धि में प्रकाश किया।।
करूँ वंदना……………..
मन इंद्रिय और बुद्धि एक मिल कर, भाव प्रेम संचार किया।
बहु रसों में फंसे फिर,एक ही रस आव्हान किया।।
श्रवण केंद्र बने बहुरंगी उनको एक रंगी बना दिया।
घट अंधियार बसा हुआ था नाम तेरे ने दूर किया।।
करूँ वंदना……………………
करूं वंदना नाम तेरी मैं,विनती सौ सौ बार करुं।
मन इंद्रिय बुद्धि सब एक मिल कर, ज्योति का संचार किया।।
नाम तेरी में ज्योति अनेकों,लाल पीली नीली बैंगनी ने मन मोह लिया।।
इंद्रिय द्वार बंद कर तूने सुरति को ऊपर खींच लिया।।
करूँ वंदना………………………….
सूरति खिंचे प्राण खिंच जावे, देह गेह कौ ध्यान दियो विसराय।
ब्रह्मपार कर पारब्रह्म पर,आत्मा रूप दियो लखाय।
घंटा शंख नफरी बाजत साज अनेकों रहो सुनाय।
छोड़ साथ सभी इंद्रियों कौ,मनुआ लहर लहर लहराए।।
करूँ वंदना…………………….
छोड़े राग साज सब जग के, मन नाम तेरे में गयो विलाय।धीरे-धीरे ज्योति तन में फैली,सिमिट सिमिट ऊपर कू जाय।।
रुक गए द्वार सभी इंद्रियों के, मन गति नाम रूप रंग लग जाय।
मन कू अंशी कहा नाम ने, जब अंशी से अंशी मिल जाय।।
करूँ वंदना…………………..
मिलो अंश से अंश तन, इंद्रिय बुद्धि श्रवण नैयन बाहर कहां जाय।
तन की सारी ज्योति इकट्ठी है गई,सूरत रूप लियो बनाय।।
पारब्रह्म जब पहुंची, शिव नेत्रऊ खुलौ है जाय।
वहां का वर्णन कहो न जाए तेरी महिमा कही न जाय।।
करूँ वंदना………………………….
नाम रूप तेरी करूं वंदना,कोटि कोटि तोकूँ नमन करूं।लख-लख गुण गाऊ मैं तेरे,चरनन में मैं शीश धरूँ।।
अंशी ने अंशी कियो रोके के घट के द्वार, नाम तोकूं वंदन बारंबार।
नाम तेरी प्रभुता अपरंपार,तेरो कोई न पाया पार।।
करूँ वंदना “नाम”रूप की………………………….
यहां “नाम” का तातपर्य उस ज्योति से है जो मानव व प्रत्येक जीव को प्रकाशित करता है।।



