
अतीक अहमद कैसे बना कुख्यात माफिया, UP LIVE News Network की खास रिपोर्ट
अतीक अहमद वो इंसान जिसने अपने खौफ का इस्तेमाल करके ना जाने कितने अपराधों को अंजाम दिया था। अतीक अहमद की हत्या के बाद उसका वर्चस्व भी समाप्त होने की कगार पर है। आइये जानते हैं अतीक अहमद की जीवन शैली, कैसे हुई शुरुआत और कैसे हुआ अंत।
अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। अतीक अहमद के पिता फिरोज अहमद गरीबी के कारण तांगा चला कर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। जैसे-जैसे अतीक अहमद की उम्र बढ़ती गई वह अपराध की दुनिया में शामिल होता है। महज 17 साल की उम्र में ही अतीक अहमद ने पहली हत्या कर दी। पहली हत्या का केस दर्ज होने के बाद से ही अतीक अहमद हत्या अपहरण,जमीन कब्जा, पुलिस के साथ मारपीट, शांति व्यवस्था भंग करने, व सरकारी काम में बाधा डालने जैसे कई संगीन आरोपों में शामिल हो गया। अतीक अहमद के खिलाफ अब तक लगभग 80 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। अतीक अहमद उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बाहरी राज्यों में भी अपराध करता था।
अतीक अहमद की सन 1996 में शाइस्ता परवीन के साथ शादी हुई थी। अतीक अहमद के पांच बेटे हैं जिनके नाम मोहम्मद असद, मोहम्मद अहजम, मोहम्मद उमर, मोहम्मद अली, और मोहम्मद आबान हैं। अतीक अहमद के पांचो बेटों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। अतीक अहमद के दो बेटे अभी भी जेल में बंद है ।
वर्ष 1989 में अतीक अहमद ने प्रयागराज पश्चिम विधानसभा सीट के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया था व जीत भी हासिल की थी । एक मिलने के बाद अतीक अहमद ने समाजवादी पार्टी को समर्थन दे दिया था। इसके बाद वह लगातार इस सीट से 5 बार विधायक रह चुका था। वर्ष 1999 में समाजवादी पार्टी को छोड़कर अतीक अहमद ने सोनलाल पटेल की पार्टी ज्वाइन कर ली थी। सोनलाल पटेल की पार्टी में अतीक अहमद को प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ाया था जहां से अतीक अहमद को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2003 में मुलायम सिंह की सरकार बनने के बाद अतीक अहमद ने एक बार फिर से समाजवादी पार्टी मैं अपना कदम रखा। वर्ष 2004 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अतीक अहमद ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और चुनाव जीतकर अतीक अहमद पहली बार लोकसभा पहुंचे।
पहली बार सांसद का चुनाव जीतने के बाद अतीक अहमद की विधानसभा सीट खाली हो गयी जिस पर चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव कराया गया। उपचुनाव में अतीक के छोटे भाई अशरद ने व बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार राजू पाल ने नामांकन किया। चुनाव के परिणाम में राजू पाल की बड़ी जीत हुई जिसके कारण अतीक अहमद और राजू पाल में विवाद पैदा हो गया। अतीक अहमद ने वर्ष 2005 में विधायक राजू पाल की हत्या करवा दी। हत्या के बाद राजू पाल की पत्नी ने अतीक अहमद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकद्दमे में राजू पाल के साले उमेश पाल अहम् गवाह थे।
24 फरवरी 2023 को अतीक अहमद ने उमेश पाल की भी गोली मारकर हत्या करवा दी। इसके बाद अतीक अहमद पर राजू पाल और उमेश पाल की हत्या का मुकदमा चल रहा था। इसी मामले में पुलिस ने अतीक अहमद और उसके भाई अशरद को पुलिस ने गिरफ्तार करके अदालत में पेश कर दिया था।
15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरद को अदालत द्वारा अनिवार्य चिकित्सा जांच के लिए ले जाते समय अस्पताल के बाहर मीडिया का रूप धारण करके आए अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।



