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नाम की महिमा भाग -17

#नाम_की_महिमा प्रस्तुति #कौशल्य_फाउंडेशन_सोसाइटी

*****भाग- 17****
*********नाम की महिमा**********
सवैया नाम के प्रताप राम सागर कूं बंधाय लियौ, नाम के प्रताप हनु लंक सी जलाई है|
नाम के प्रताप राम वालि कूं डहाय दियौ,नाम के प्रताप राम लंका जीत पाई है||
नाम कौ बखेड़ा ये नाम की कहानी सब,नाम की तौ सार काऊ बिरले जन पायी है |
कहत है भरत बैन बिन नाम नहीं सुख चैन,नाम की महिमा सब वेदों ने ही गाई है ||

सोरठा सो मन करउ विचार ,तजि सब भ्रम भजि नाम कूं|
होय तभी उद्धार ,जब पहुंचे निज देश कूं||

चौपाई सुंदर सुखद नाम की लीला,जपहिं नाम बुद्धि बनहिं अति शीला|
चतुर गुनी अति वोही जग माही,नाम जपहिं निज बासर माही ||
लोभ क्रोध सपनेहु जाके,दंभ कपट छल छिद्र न ताके |
नाम बसत जिनके मन माही,दूसर आस भरोसा नाही ||

सोरठा अक्षर लेखे राम,जगत अनेकों है गए |
किया दुष्ट संहार वौऊ नाम कि कह गये ||

चौपाई जनकऊ मोह हुआ अति भारा,अष्टबक्र दिया नाम सहारा|
नाम की महिमा कहीं गोसांई,नानक संत कबीरऊगाई||
रमा रोम में नाम सदा ही, करे कृतारथ जीव सदा ही|
नाम ही रूप धरे अवतारा,कपिल ऋषभ सब नाम पुकारा||
जपेऊ नाम मनु सत रूपा,पाएऊ वर आपन मन रूपा|
बसहिं नाम जिनके घट माही ,सदा शिरोमणि शील सुभाहीं ||

दोहा निराकार साकार तू ,बना संत अवतार |
सब जीव तेरी ही ज्योति हैं,जद चेतन आधार ||

 

 

**************भरत सिंह (अध्यात्मिक विद)*******************

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